मधुमक्खी का छत्ता साबित होगी जातीय जनगणना
मधुमक्खी का छत्ता साबित होगी जातीय जनगणना कांग्रेस के लिए जातीय जनगणना का मुद्दा उठाना तो आसान है लेकिन इससे जुड़ी चुनौतियों का सामना करना उतना ही मुश्किल है. दरअसल, जातीय जनगणना का सवाल मधुमक्खी का छत्ता बना दिख रहा है. हाथ डालकर मधु निकालने का लोभ है, तो मधुमक्खियों का डर भी. नई दिल्ली : जातीय जनगणना, 2024 के आम चुनाव में मुद्दा बनेगा- यह तय हो चुका है. राहुल गांधी ने राजस्थान में जातीय सर्वेक्षण कराने और कांग्रेस शासित हर प्रदेश में ऐसा करने का वादा करते हुए देशभर में जातीय जगणना कराने की मांग रखी है. वहीं, कर्नाटक में छह साल पहले हुए जातीय सर्वेक्षण के आंकड़े जारी करने के लिए बीजेपी ने दबाव की सियासत तेज कर दी है. इन उदाहरणों के परिप्रेक्ष्य में सैद्धांतिक तौर पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही जातीय जनगणना के पक्ष में दिख रही हैं. लेकिन, क्या कांग्रेस और बीजेपी दोनों जातीय जनगणना के मुद्दे पर सहूलियत की स्थिति में हैं? जातीय जनगणना का कार्ड वोटरों की संख्या देखकर खेला जा रहा है, लेकिन इसका विरोध संगठित जातियों की ओर से है जो राजनीति में प्रभाव रखते हैं. राजनीतिक दलों के...